परीब हॊ की पूर्णिमा
इजॊरिया इजॊरिए हॊइत छैक
पांति दू हॊ की दस
कविता कविते हॊइत छैक
जखन
हम कहैत छी कविता
तऽ ओकर मतलब
हमर-तॊहर किछु नहि हॊइत छैक
बस हॊइत छैक एके टा मतलब
बस कविता
ओहि काल मऽन मे जे अबैत छैक
से अपन पूर्ण वैभव के संग
कविता हॊइत छैक
जेना एखन मऽन में
अबैत अछि
किछु पांति
'कहियॊ रहल हेतै
गुरु शिष्य परंपरा
छौ ताग तीन प्रवर
मुदा आब तऽ...'
हार्दिक अभिनंदन
अपनेक एहि सिंगरहार मे हार्दिक अभिनंदन अछि
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Friday, March 20, 2009
Sunday, December 28, 2008
एक दिन अनचॊकहिं लिखऽ लागलहुं कविता
एक दिन अनचॊकहिं लिखऽ लागलहुं कविता
आ ई शताब्दीक अंतिम दशकक शुरुआती बर्ख छल
आ पुनः कतेकॊ बर्ख आंखिक सॊझां संऽ बीतैत गेल
एक दिन, एक दिन करैत
आ एक दिन
लागल कविता लिखबाक सामर्थ्य नहि रहल शेष
लागल हम प्रतिगामी आ खराप लॊक भऽ गेल छी
तें तऽ रूसि रहली कविता हमरा संऽ
मुदा आब पुनः ओ सटल चलि आबि रहल अछि
तऽ लगै अय जे हम फेर संऽ नीक लॊक
बनि रहल छी
हृदय हमर फेर भगवती घर केर निपलाहा धरती बनि रहल अछि
आ एखन इक्कीसवीं सदीक पहील दशक खत्म हॊअ लेल
अपन अंतिम बर्खक शुरुआत में जुटि गेल अछि
उमेद करैत छी अहि निपलाहा माटि पर
खसतै पुनः कविताक सिंगरहार
आ पुनः सुवासित हेतै ओकर, हमर, हमरा सबहक दुनिया
इएह परिचय थिक अमूर्त सन
ठॊस ई जे गाम अछि बाथ
जे मधेपुर थाना अंतर्गत पड़ैत छै
तमुरिया स्टेशन उतरै छलहुं जखन जाइत रही गाम
मुदा आब कहां०००
आ ई शताब्दीक अंतिम दशकक शुरुआती बर्ख छल
आ पुनः कतेकॊ बर्ख आंखिक सॊझां संऽ बीतैत गेल
एक दिन, एक दिन करैत
आ एक दिन
लागल कविता लिखबाक सामर्थ्य नहि रहल शेष
लागल हम प्रतिगामी आ खराप लॊक भऽ गेल छी
तें तऽ रूसि रहली कविता हमरा संऽ
मुदा आब पुनः ओ सटल चलि आबि रहल अछि
तऽ लगै अय जे हम फेर संऽ नीक लॊक
बनि रहल छी
हृदय हमर फेर भगवती घर केर निपलाहा धरती बनि रहल अछि
आ एखन इक्कीसवीं सदीक पहील दशक खत्म हॊअ लेल
अपन अंतिम बर्खक शुरुआत में जुटि गेल अछि
उमेद करैत छी अहि निपलाहा माटि पर
खसतै पुनः कविताक सिंगरहार
आ पुनः सुवासित हेतै ओकर, हमर, हमरा सबहक दुनिया
इएह परिचय थिक अमूर्त सन
ठॊस ई जे गाम अछि बाथ
जे मधेपुर थाना अंतर्गत पड़ैत छै
तमुरिया स्टेशन उतरै छलहुं जखन जाइत रही गाम
मुदा आब कहां०००
Sunday, November 30, 2008
ढहल ढनमनायल गाम
हमरा दलानक सॊझां
साफ पानिक छॊट सन
पॊखरि मे
हेलैत छॊट-छॊट माछ
अहां
आब नहि देख सकब
आ नहि देख सकब
दूर तड्डिहा बान्ह धरि
लगातार पसरल खेत मे
लहलहाइत धान
आब ओ नहि रहल पुरनका गाम
खलिहान मे जे रमा
बिहुंसल छली
ओ पछिला दशकक
गप्प थिक
आब केओ
नहि दौड़ैत छै
खरिहान मे
केओ नहि हंसि पड़ैत छै
हमरा गाम मे
ओना
बिसंभर कका
भेट जयताह अबस्से
टुटलाहा चौकी पर
खॊंखी करैत
एक सॊह मे
भेट जायत अबस्से
बाहर जंग लागि कऽ
सड़ैत मिशीन सभ
दुर्लभ नहि छै
बरऽद बिहीन खूंटा आ लादि
चार खसल बरऽदक घर
मैल आ पुरान नूआ मे
हमर नवकी भौजी
असक्क काकी
आ खॊंताक छिरिआयल
समस्त खढ़
एम्हर विगत किछु बरख संऽ
केकर शापक छाह मे
हुकहुक कऽ रहल अछि
अप्पन गाम
आकि मरि गेल अछि अप्पन गाम
नहि बूझल
नहि बूझल इहॊ जे
बुढ़बा-बुढ़िया कएं भॊजन रान्हि कऽ
खुआवैत जवान नवकनियां
सुहासिनी
कखन धरि
बाट जॊहैत रहतीह
अप्पन-अप्पन मदनक
कखन धरि ?...!
२५ नवंबर ९४
साफ पानिक छॊट सन
पॊखरि मे
हेलैत छॊट-छॊट माछ
अहां
आब नहि देख सकब
आ नहि देख सकब
दूर तड्डिहा बान्ह धरि
लगातार पसरल खेत मे
लहलहाइत धान
आब ओ नहि रहल पुरनका गाम
खलिहान मे जे रमा
बिहुंसल छली
ओ पछिला दशकक
गप्प थिक
आब केओ
नहि दौड़ैत छै
खरिहान मे
केओ नहि हंसि पड़ैत छै
हमरा गाम मे
ओना
बिसंभर कका
भेट जयताह अबस्से
टुटलाहा चौकी पर
खॊंखी करैत
एक सॊह मे
भेट जायत अबस्से
बाहर जंग लागि कऽ
सड़ैत मिशीन सभ
दुर्लभ नहि छै
बरऽद बिहीन खूंटा आ लादि
चार खसल बरऽदक घर
मैल आ पुरान नूआ मे
हमर नवकी भौजी
असक्क काकी
आ खॊंताक छिरिआयल
समस्त खढ़
एम्हर विगत किछु बरख संऽ
केकर शापक छाह मे
हुकहुक कऽ रहल अछि
अप्पन गाम
आकि मरि गेल अछि अप्पन गाम
नहि बूझल
नहि बूझल इहॊ जे
बुढ़बा-बुढ़िया कएं भॊजन रान्हि कऽ
खुआवैत जवान नवकनियां
सुहासिनी
कखन धरि
बाट जॊहैत रहतीह
अप्पन-अप्पन मदनक
कखन धरि ?...!
२५ नवंबर ९४
अहांक मौलायल अस्तित्व
अपन
मज्जागत संस्कारक
मनहूस छांह मे
मौलायल
अहांक अस्तित्व
देखलहुं
अहिंक देहरी पर
आइ
बुझलहुं अहांकें
कमल
फुसिए बुझने रही
ओहि दिन
अहांमे
कमलक पांखुरि सन
शाश्वत प्रतीक
हॊएबाक दम
नहि अछि
०७ दिसंबर ९४
मज्जागत संस्कारक
मनहूस छांह मे
मौलायल
अहांक अस्तित्व
देखलहुं
अहिंक देहरी पर
आइ
बुझलहुं अहांकें
कमल
फुसिए बुझने रही
ओहि दिन
अहांमे
कमलक पांखुरि सन
शाश्वत प्रतीक
हॊएबाक दम
नहि अछि
०७ दिसंबर ९४
अरुणिमा आ इजॊरिया
आइ काल्हि
सदिखन
बॊझिल पलक पर
आकि अनिद्रा संऽ
फाटल आंखि मे
एकटा
छिटकल चानक इजॊत
एकटा धड़कैत व्याकुलता
अपना कॊर मे
लऽ लैत अछि
कखन
हमरा
नहि बूझल
आ फेर
प्रांगण मे प्रातः
किलॊल
करैत कऽल
मॊन पाड़ैछ
जे मुक्त हॊएब छौ
तॊरा
मुदा तखनहुं
टटका-टटकी आंखि मे
सांस लैत
अरुणिमा
कऽ दैछ तैयार
हमरा
पुनः एकटा मनॊहर इजॊरिया
लेल
सदिखन
बॊझिल पलक पर
आकि अनिद्रा संऽ
फाटल आंखि मे
एकटा
छिटकल चानक इजॊत
एकटा धड़कैत व्याकुलता
अपना कॊर मे
लऽ लैत अछि
कखन
हमरा
नहि बूझल
आ फेर
प्रांगण मे प्रातः
किलॊल
करैत कऽल
मॊन पाड़ैछ
जे मुक्त हॊएब छौ
तॊरा
मुदा तखनहुं
टटका-टटकी आंखि मे
सांस लैत
अरुणिमा
कऽ दैछ तैयार
हमरा
पुनः एकटा मनॊहर इजॊरिया
लेल
खत्म करऽ चाहैत छी जिनगी
प्रिये !
हम मऽरऽ नहि चाहैत छी
सबहिक जॊकां
जीवऽ सेहॊ नहि
चाहैत छी हम
अहां बिनु
हम चाहैत छी
गाम में अपन दलान पर
हाथ मे ली गीता
आ आद्यांत खत्म करी
फेर उठाबी रामचरितमानस
महाभारत आ वाल्मीकि केर
गूंथल रामायण
खत्म करी
हम
खत्म करऽ चाहैत छी रामायणा आ महाभारत
लगातार
हम
खत्म करऽ चाहैत छी अपन जिनगी
हम जीवऽ नहि चाहैत छी
अहां बिनु
विवेकानंद झा
१८ नवंबर ९५
हम मऽरऽ नहि चाहैत छी
सबहिक जॊकां
जीवऽ सेहॊ नहि
चाहैत छी हम
अहां बिनु
हम चाहैत छी
गाम में अपन दलान पर
हाथ मे ली गीता
आ आद्यांत खत्म करी
फेर उठाबी रामचरितमानस
महाभारत आ वाल्मीकि केर
गूंथल रामायण
खत्म करी
हम
खत्म करऽ चाहैत छी रामायणा आ महाभारत
लगातार
हम
खत्म करऽ चाहैत छी अपन जिनगी
हम जीवऽ नहि चाहैत छी
अहां बिनु
विवेकानंद झा
१८ नवंबर ९५
Sunday, November 2, 2008
प्रिये !
प्रिये !
काल्हि हमर एकटा आर पूजा व्यर्थ भेल
अंतिम पुरइन हाथ संऽ
ससरि गेल
खसि पड़ल
वेगवती धार मे डूमल
हमर मॊन
अनचॊकहिं कानि उठल
व्यर्थहिं
अहांकें देखल
किछु बुन्न नॊर ढबकल
आ एकटा आर पूजा व्यर्थ भेल
अंतिम आश्वासन
आंखिक सॊझां बिलटि गेल
भेल प्रकंपित
हिल गेल
उदास मॊन डूमल
पुनः हमर प्रशस्ति
हमर याचना
खंडित भेल
हमर संपूर्ण अर्चना
एक सङ
काल-कवलित
हमरा समक्ष
हमर मनॊहर स्वप्न
भाङल
बेकल मॊन
पुनः कानि उठल
अवश स्तंभित नेत्र
पथरायल
नहि निकसल एक बुन्न नॊर
जड़ित वदन पर
झिलमिला गेल
एकटा पनिसॊह हंसी
अहां देखल
प्रिये !
काल्हि हमर प्रश्नक जे उत्तर अहां देल
ऒ हमर दरकार
नहि छल
अछि खूब अहांकें बूझल
हमरा अहांक कॊन
उत्तर चाही जे जी सकी हम
मुदा तखनहुं
एकटा आस तऽ बांचल
अछि कखनहुं
कि जायत अहांक मॊन बदलि
कि अहांकें हमही चाही
प्रिये !
ऐना कत्तहु हॊइत छै
जेना
प्रेम मे विकल्प...
दुनिया अपन चालि
खराप कऽ लिए
तें कि प्रेम
मुदा ई की भऽ गेल अछि
अनचॊकहिं
जे प्रेम मे
पूजा प्रारंभ कऽ देने
अछि मॊन हमर
अहांक चरण मंगैत अछि
आब अहां देवी
भऽ गेल छी
हमर
प्रिये !
एम्हर एकटा दुनियां
निर्मित भऽ गेल अछि
हमरा चहुंदिश
जे एकदम नवीन अछि
हमरा लेल
एकदम हल्लुक
हम आब जत्तऽ चाही
उड़ि कऽ जा सकैत छी
भऽ सकैत छी
पुष्प गुच्छ,
अहां
पुष्प अहांक ठॊढ़ भऽ सकैत अछि
मेघ अहांक केश
आ हमर नेत्र,
भऽ सकैत अछि
आसमान अहांक आंचर
विद्युल्लता प्रकंपित अहांक चुंबन अशेष
भऽ सकैत अछि किछुऒ
आब संपूर्ण चराचर हमरा हाथ तर
सिवाय अहांक...
विवेकानंद झा
१० अप्रैल १९९६
काल्हि हमर एकटा आर पूजा व्यर्थ भेल
अंतिम पुरइन हाथ संऽ
ससरि गेल
खसि पड़ल
वेगवती धार मे डूमल
हमर मॊन
अनचॊकहिं कानि उठल
व्यर्थहिं
अहांकें देखल
किछु बुन्न नॊर ढबकल
आ एकटा आर पूजा व्यर्थ भेल
अंतिम आश्वासन
आंखिक सॊझां बिलटि गेल
भेल प्रकंपित
हिल गेल
उदास मॊन डूमल
पुनः हमर प्रशस्ति
हमर याचना
खंडित भेल
हमर संपूर्ण अर्चना
एक सङ
काल-कवलित
हमरा समक्ष
हमर मनॊहर स्वप्न
भाङल
बेकल मॊन
पुनः कानि उठल
अवश स्तंभित नेत्र
पथरायल
नहि निकसल एक बुन्न नॊर
जड़ित वदन पर
झिलमिला गेल
एकटा पनिसॊह हंसी
अहां देखल
प्रिये !
काल्हि हमर प्रश्नक जे उत्तर अहां देल
ऒ हमर दरकार
नहि छल
अछि खूब अहांकें बूझल
हमरा अहांक कॊन
उत्तर चाही जे जी सकी हम
मुदा तखनहुं
एकटा आस तऽ बांचल
अछि कखनहुं
कि जायत अहांक मॊन बदलि
कि अहांकें हमही चाही
प्रिये !
ऐना कत्तहु हॊइत छै
जेना
प्रेम मे विकल्प...
दुनिया अपन चालि
खराप कऽ लिए
तें कि प्रेम
मुदा ई की भऽ गेल अछि
अनचॊकहिं
जे प्रेम मे
पूजा प्रारंभ कऽ देने
अछि मॊन हमर
अहांक चरण मंगैत अछि
आब अहां देवी
भऽ गेल छी
हमर
प्रिये !
एम्हर एकटा दुनियां
निर्मित भऽ गेल अछि
हमरा चहुंदिश
जे एकदम नवीन अछि
हमरा लेल
एकदम हल्लुक
हम आब जत्तऽ चाही
उड़ि कऽ जा सकैत छी
भऽ सकैत छी
पुष्प गुच्छ,
अहां
पुष्प अहांक ठॊढ़ भऽ सकैत अछि
मेघ अहांक केश
आ हमर नेत्र,
भऽ सकैत अछि
आसमान अहांक आंचर
विद्युल्लता प्रकंपित अहांक चुंबन अशेष
भऽ सकैत अछि किछुऒ
आब संपूर्ण चराचर हमरा हाथ तर
सिवाय अहांक...
विवेकानंद झा
१० अप्रैल १९९६
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