हार्दिक अभिनंदन

अपनेक एहि सिंगरहार मे हार्दिक अभिनंदन अछि

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Friday, March 20, 2009

कविता कविते हॊइत छैक

परीब हॊ की पूर्णिमा
इजॊरिया इजॊरिए हॊइत छैक
पांति दू हॊ की दस
कविता कविते हॊइत छैक
जखन
हम कहैत छी कविता
तऽ ओकर मतलब
हमर-तॊहर किछु नहि हॊइत छैक
बस हॊइत छैक एके टा मतलब
बस कविता
ओहि काल मऽन मे जे अबैत छैक
से अपन पूर्ण वैभव के संग
कविता हॊइत छैक
जेना एखन मऽन में
अबैत अछि
किछु पांति
'कहियॊ रहल हेतै
गुरु शिष्य परंपरा
छौ ताग तीन प्रवर
मुदा आब तऽ...'

4 comments:

Gajendra Thakur said...

सभ कविता अहाँक पढ़ि गेलहुँ। स्वागत अछि।

दिल दुखता है... said...

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका सादर स्वागत है....

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

MAYUR said...

बहुत बढिया लिखा है आपने , इसी तरह उर्जा के साथ लिखते रहे ।

बहुत धन्यवाद
मयूर
अपनी अपनी डगर